कौनसे Buy-Sell सिग्नल्स को अवॉइड करना चाहिए?

AlgoMaxx Indicator एक पावरफुल टूल है, लेकिन हर सिग्नल पर बिना सोचे-समझे ट्रेड करना गलत हो सकता है। नीचे दिए गए पॉइंट्स से आप समझ सकते हैं कि कौनसे सिग्नल्स को अवॉइड करना चाहिए:

1. चॉपी मार्केट (Ranging Market) सिग्नल्स को अवॉइड करें

  • चॉपी मार्केट तब होता है जब प्राइस एक रेंज के अंदर घूमता रहता है और कोई स्पष्ट ट्रेंड नहीं होता।

  • अवॉइड करने का कारण:

    • रेंज-बाउंड मार्केट में फॉल्स ब्रेकआउट्स और फेक सिग्नल्स ज्यादा मिलते हैं।

    • ट्रेंड-बेस्ड इंडिकेटर्स (EMA रिबन्स, RSI, ट्रेंड स्क्रीनर) सटीक काम नहीं करते।

  • कैसे अवॉइड करें?

    • रेंज डिटेक्शन बॉक्स देखकर कन्फर्म करें कि प्राइस चॉपी मार्केट में तो नहीं है।

    • जब तक प्राइस रेंज के बाहर ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन न करे, तब तक ट्रेड न करें।

2. कमजोर RSI कन्फर्मेशन सिग्नल्स

  • अगर RSI Overbought (70 से ऊपर) है लेकिन प्राइस अपट्रेंड में है, तो सेल सिग्नल अवॉइड करें।

  • अगर RSI Oversold (30 से नीचे) है लेकिन प्राइस डाउनट्रेंड में है, तो बाय सिग्नल अवॉइड करें।

  • अवॉइड करने का कारण:

    • RSI रिवर्सल तब ही सटीक होता है जब प्राइस सपोर्ट या रेजिस्टेंस ज़ोन के पास हो।

    • ट्रेंड के खिलाफ ट्रेड करना जोखिम भरा होता है।

  • कैसे अवॉइड करें?

    • RSI के साथ डिमांड/सप्लाई ज़ोन और ब्रेकआउट सिग्नल्स का कन्फर्मेशन देखें।

3. फॉल्स ब्रेकआउट्स

  • जब प्राइस अस्थायी रूप से ब्रेकआउट (ऊपर जाए) करे लेकिन फिर से रेंज के अंदर आ जाए, तो इस सिग्नल को अवॉइड करें।

  • जब प्राइस ब्रेकडाउन (नीचे जाए) करे और तुरंत वापस रेंज के ऊपर आ जाए, तो इस सिग्नल को इग्नोर करें।

  • अवॉइड करने का कारण:

    • फॉल्स ब्रेकआउट्स से नुकसान होने की संभावना ज्यादा रहती है, खासकर जब वॉल्यूम कम हो।

  • कैसे अवॉइड करें?

    • वॉल्यूम एनालिसिस करें: ब्रेकआउट के समय हाई वॉल्यूम होना चाहिए।

    • ट्रेंड स्क्रीनर के साथ ब्रेकआउट सिग्नल का कन्फर्मेशन करें।

4. काउंटर-ट्रेंड सिग्नल्स

  • अगर सिग्नल ट्रेंड के खिलाफ हो रहा हो, तो अवॉइड करें।

    • उदाहरण: जब ट्रेंड रिबन ग्रीन हो (अपट्रेंड) और सेल सिग्नल आए, तो इग्नोर करें।

    • उदाहरण: जब ट्रेंड रिबन रेड हो (डाउनट्रेंड) और बाय सिग्नल आए, तो अवॉइड करें।

  • अवॉइड करने का कारण:

    • ट्रेंड के खिलाफ ट्रेड करना हमेशा ज्यादा जोखिम भरा और कम सटीक होता है।

  • कैसे अवॉइड करें?

    • ट्रेंड स्क्रीनर और EMA रिबन का उपयोग करके ट्रेंड डायरेक्शन का कन्फर्मेशन करें।

5. लेट एंट्री सिग्नल्स

  • जब सिग्नल पहले से ही ट्रेंड के पीक या बॉटम के करीब हो, तो अवॉइड करें।

  • अवॉइड करने का कारण:

    • लेट एंट्री सिग्नल्स में प्रॉफिट पोटेंशियल कम और जोखिम ज्यादा होता है।

  • कैसे अवॉइड करें?

    • AlgoMaxx का रिस्क-रिवॉर्ड टूल का उपयोग करें और SL और TP लेवल्स को चेक करें।

7. मल्टी-टाइमफ्रेम डिसएग्रीमेंट

  • अगर हाई टाइमफ्रेम का ट्रेंड लो टाइमफ्रेम के सिग्नल के विपरीत हो, तो सिग्नल अवॉइड करें।

  • अवॉइड करने का कारण:

    • हाई टाइमफ्रेम्स ज्यादा विश्वसनीय और सटीक होते हैं।

  • कैसे अवॉइड करें?

    • ट्रेंड स्क्रीनर का उपयोग करके सुनिश्चित करें कि मल्टीपल टाइमफ्रेम्स अलाइंड हैं।

8. डिमांड और सप्लाई ज़ोन के पास सिग्नल को कैसे हैंडल करें?

A. सप्लाई ज़ोन के पास बाय सिग्नल को कैसे अवॉइड करें?

  • स्थिति: जब प्राइस सप्लाई ज़ोन के पास हो और बाय सिग्नल मिले।

  • अवॉइड करने का कारण: सप्लाई ज़ोन एक रेसिस्टेंस ज़ोन होता है, जहां से प्राइस अक्सर गिरता है। सीधे बाय सिग्नल लेने से नुकसान हो सकता है।

  • क्या करें?

    1. सप्लाई ज़ोन का ब्रेकआउट वेट करें:

      • प्राइस को सप्लाई ज़ोन के ऊपर ब्रेक करना चाहिए।

      • यह दर्शाता है कि रेसिस्टेंस कमजोर हो चुका है।

    2. रिट्रेसमेंट और रेजेक्शन वेट करें:

      • सप्लाई ज़ोन के ऊपर ब्रेक करने के बाद, प्राइस को वापस उसी ज़ोन तक आकर बाउंस करना चाहिए।

      • यह दर्शाता है कि अब वह ज़ोन रेसिस्टेंस से सपोर्ट में बदल गया है।

    3. कंफर्मेशन सिग्नल:

      • रेजेक्शन के बाद मिलने वाले बाय सिग्नल को ट्रेड करें।

B. डिमांड ज़ोन के पास सेल सिग्नल को कैसे अवॉइड करें?

  • स्थिति: जब प्राइस डिमांड ज़ोन के पास हो और सेल सिग्नल मिले।

  • अवॉइड करने का कारण: डिमांड ज़ोन एक सपोर्ट ज़ोन होता है, जहां से प्राइस अक्सर बाउंस करता है। ऐसे में सीधे सेल सिग्नल पर एंट्री लेने से नुकसान हो सकता है।

  • क्या करें?

    1. डिमांड ज़ोन का ब्रेकआउट वेट करें:

      • प्राइस को डिमांड ज़ोन के नीचे ब्रेक करना चाहिए।

      • यह दर्शाता है कि सपोर्ट कमजोर हो चुका है।

    2. रिट्रेसमेंट और रेजेक्शन वेट करें:

      • डिमांड ज़ोन के नीचे ब्रेक करने के बाद, प्राइस को वापस उसी ज़ोन तक आकर रेजेक्ट होना चाहिए।

      • रेजेक्शन से यह स्पष्ट होता है कि अब वह ज़ोन सपोर्ट से रेसिस्टेंस में बदल गया है।

    3. कंफर्मेशन सिग्नल:

      • रेजेक्शन के बाद मिलने वाले सेल सिग्नल को ट्रेड करें।

प्रक्रिया चार्ट के अनुसार:

डिमांड ज़ोन के पास सेल सिग्नल:

  1. प्राइस डिमांड ज़ोन के नीचे ब्रेक करे।

  2. ब्रेक के बाद प्राइस वापस डिमांड ज़ोन तक रिट्रेस करे।

  3. ज़ोन के पास प्राइस रेजेक्ट हो।

  4. रेजेक्शन के बाद सेल सिग्नल पर ट्रेड करें।

सप्लाई ज़ोन के पास बाय सिग्नल:

  1. प्राइस सप्लाई ज़ोन के ऊपर ब्रेक करे।

  2. ब्रेक के बाद प्राइस वापस सप्लाई ज़ोन तक रिट्रेस करे।

  3. ज़ोन के पास प्राइस बाउंस करे।

  4. बाउंस के बाद बाय सिग्नल पर ट्रेड करें।

ध्यान देने योग्य बातें:

  • वॉल्यूम का कंफर्मेशन: ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन के समय हाई वॉल्यूम होना चाहिए।

  • RSI का उपयोग:

    • डिमांड ज़ोन के पास RSI ओवरसोल्ड (30 के करीब) होना चाहिए।

    • सप्लाई ज़ोन के पास RSI ओवरबॉट (70 के करीब) होना चाहिए।

  • ट्रेंड स्क्रीनर का उपयोग: ट्रेंड स्क्रीनर और रिबन्स को चेक करें कि वे सिग्नल के साथ मेल खाते हैं या नहीं।


गलत सिग्नल्स से बचाव:

  • डिमांड ज़ोन के पास सेल सिग्नल को तब तक अवॉइड करें, जब तक ज़ोन टूटकर रिट्रेस और रेजेक्शन न हो।

  • सप्लाई ज़ोन के पास बाय सिग्नल को तब तक अवॉइड करें, जब तक ज़ोन टूटकर रिट्रेस और बाउंस न हो।

लाभ:

  1. फॉल्स सिग्नल्स से बचाव।

  2. हाई-प्रॉबेबिलिटी ट्रेड्स पर फोकस।

  3. बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो।

  4. अधिक सटीकता और स्थिर लाभ।

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